सिंगरौली के किसान ऑनलाइन कृषि प्रशिक्षण में महा झींगा पालन की तकनीकें सीखते हुए।

सिंगरौली के किसानों के लिए कृषि: महा झींगा पालन प्रशिक्षण

सिंगरौली जिले के किसानों को हाल ही में महा झींगा पालन की उन्नत तकनीकों पर एक विशेष ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। यह पहल मुख्यमंत्री मत्स्य समृद्धि योजना (सीएमएमएसवाय) के तहत मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 20 मार्च 2026 को आयोजित की गई। इस कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों को मीठे पानी में झींगा पालन से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी और इसे स्वरोजगार के रूप में अपनाने के लाभ बताए गए, जिससे उन्हें एक ही तालाब से दोहरा लाभ कमाने का अवसर मिलेगा।

महा झींगा पालन प्रशिक्षण: किसानों के लिए एक नया कृषि अवसर

सिंगरौली के किसानों के लिए महा झींगा पालन पर यह ऑनलाइन प्रशिक्षण एक महत्वपूर्ण कदम है, जो उन्हें आधुनिक कृषि पद्धतियों से परिचित कराता है। इस वर्चुअल कार्यक्रम का निर्देशन जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के संचालक विस्तार सेवाएँ डॉ. टी. आर. शर्मा और कृषि विज्ञान केंद्र, सिंगरौली के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जय सिंह के समन्वय में किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र टीकमगढ़ के मत्स्य वैज्ञानिक डॉ. सतेंद्र कुमार ने मुख्य प्रशिक्षक के रूप में किसानों को विस्तृत जानकारी दी।

प्रशिक्षण का उद्देश्य और महत्व

इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य सिंगरौली के मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि करना और उनके लिए पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह कार्यक्रम किसानों को झींगा पालन की वैज्ञानिक और व्यावहारिक जानकारी देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रेरित करता है।

प्रशिक्षण में शामिल मुख्य विषय

डॉ. सतेंद्र कुमार ने गूगल मीट के माध्यम से आयोजित इस सत्र में तीन महत्वपूर्ण तकनीकी विषयों पर प्रस्तुतियां दीं:

  • महा झींगा का जीवन चक्र एवं बीज उत्पादन: मीठे पानी में झींगा पालन की शुरुआत, बीज उत्पादन और इसके जीवन चक्र की वैज्ञानिक जानकारी प्रदान की गई।
  • आजीविका एवं पोषण सुरक्षा: मध्य प्रदेश के परिप्रेक्ष्य में झींगा पालन को स्वरोजगार के रूप में अपनाने के लाभों पर जोर दिया गया, जिससे किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त होने में मदद मिल सके। सरकार की कई योजनाएं, जैसे PM Kisan status check, भी किसानों की आय सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • कार्प एवं झींगा का मिश्रित पालन: मछलियों (रोहू, कतला, मृगल) के साथ झींगा पालन कर एक ही तालाब से दोहरा लाभ प्राप्त करने की तकनीक सिखाई गई, जो संसाधनों के अधिकतम उपयोग को सुनिश्चित करती है।

महा झींगा पालन की उन्नत तकनीकें

प्रशिक्षण के दौरान, डॉ. कुमार ने किसानों को महा झींगा (Giant Freshwater Prawn) पालन की कुछ विशेष तकनीकें बताईं:

  • महा झींगा तालाब की तलहटी में रहता है, इसलिए कार्प मछलियों के साथ इसका पालन अत्यंत लाभदायक है।
  • बीज संचयन (पी.एल.-20): झींगा के बीज के सही चयन और संचयन के तरीके बताए गए।
  • आहार प्रबंधन: झींगा के लिए उचित और संतुलित आहार प्रबंधन पर जोर दिया गया, जो उनके तेजी से विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
  • जल की गुणवत्ता बनाए रखना: तालाब में जल की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए एयरेटर के उपयोग और अन्य वैज्ञानिक विधियों की जानकारी दी गई।

इस वर्चुअल सत्र के आयोजन में सहायक संचालक मत्स्योद्योग (सिंगरौली) श्री मनोज अग्रवाल का विशेष सहयोग रहा। बड़ी संख्या में मत्स्य पालकों ने इसमें भाग लिया और झींगा पालन से संबंधित अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया। कई किसान अपनी खेती के लिए Kisan Credit Card का भी लाभ उठा सकते हैं।

किसानों के लिए इसका क्या अर्थ है?

किसान पोर्टल के विश्लेषण के अनुसार, सिंगरौली के किसानों के लिए यह ऑनलाइन प्रशिक्षण एक गेमचेंजर साबित हो सकता है। यह उन्हें पारंपरिक कृषि से हटकर एक नए और लाभदायक क्षेत्र, मत्स्य पालन, में प्रवेश करने का अवसर प्रदान करता है। महा झींगा का मिश्रित पालन तकनीक अपनाकर किसान अपने मौजूदा तालाबों का बेहतर उपयोग कर सकते हैं और अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं। डिजिटल माध्यम से ज्ञान का प्रसार सुदूर क्षेत्रों तक पहुँच सुनिश्चित करता है, जिससे अधिक से अधिक किसान विशेषज्ञ मार्गदर्शन का लाभ उठा सकें। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ाने में सहायक होगा।

सिंगरौली में मत्स्य पालन को बढ़ावा

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने सिंगरौली जिले में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत नींव रखी है। तकनीकी ज्ञान के डिजिटल माध्यम से प्रसार ने सुदूर क्षेत्रों के किसानों को भी विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्राप्त करने में सक्षम बनाया है। यह पहल न केवल किसानों की आय में वृद्धि करेगी, बल्कि क्षेत्र की पोषण सुरक्षा में भी सुधार लाएगी। सरकार द्वारा मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए की जा रही कोशिशों के बारे में अधिक जानकारी आप मत्स्य विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर प्राप्त कर सकते हैं।

आगे क्या करें?

जो किसान इस प्रशिक्षण में शामिल नहीं हो पाए, उन्हें कृषि विज्ञान केंद्र, सिंगरौली से संपर्क करके महा झींगा पालन से संबंधित जानकारी और भविष्य के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बारे में पूछना चाहिए। इस नई कृषि तकनीक को अपनाकर आप अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं और एक सफल मत्स्य पालक बन सकते हैं।

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